क्या हुआ जो युग हमारे आगमन पर मौन? सूर्य की पहली किरण पहचानता है कौन? अर्थ कल लेंगे हमारे आज के संकेत। #दुष्यन्तकुमार आज मुझे खामोशी की आवाज़ सुननी थी। मगर कही सुनाई नहीं दी। रोजमर्रा की जिंदगी में इतने सारे हादसे होते रहते है की उनका महत्व कम हो गया है। उन्हें बार बार दोहराने का कोई फायदा ही नहीं। पहले किसी दोस्त को मन की दुविधा कितनी आसानी से बता दिया करती थी मैं, आज उसी दोस्त को मेरी बातों का बोझ न लगे इसी विवंचना के कारण मैं खामोश हो जाती हूँ। कितनी अजीब बात है की हम में से कई लोगों को एहसास तक नहीं होता जिंदगी की इस टेढ़ी-मेढ़ी झंझटों का और यदि एहसास हो भी जायें तो उसमें से बाहर कैसे निकले ये एक नयी पहेली सामने आ खड़ी उठती है। कुछ साल पहले तक मुझे खुदसे बहुत शिकायत होती थी की मेरी जिंदगी किसी और की तरह क्यों नहीं है। जैसे मैं किसी और को अपने नजर से देखती थी तो उनकी जिंदगी मुझे बड़ी परिपूर्ण लगती थी और खुदकी बहुत कष्टप्राय। यह एहसास श्री. मुन्शी प्रेमचंदजी की कहानियाँ पढ़कर द्विगुणित हो जाता था। फिर धीरे- धीरे बात ऐसी समझ आयीं की ना ही किसी और के सुख से हमें अपने दुखों का क...
"Some of the sweetest things in life are through greatest struggling battles"